असुरक्षित और स्वतंत्र विचारक के मार्ग पर चलें। अपने विचारों को बहस और विवादों के सामने रखें। खुलकर बोलें और लीक पर चलने की मजबूरी से डरने के बजाय सनकी कहे जाने के डर को कम करें
* Quoted in Percy S. Smith, "Current Events", The Classical Journal, vol. 36, no. 1 (October, 1940), p. 55
* Quoted in Percy S. Smith, "Current Events", The Classical Journal, vol. 36, no. 1 (October, 1940), p. 55